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तारों का निर्माण

तारों का जन्म विशाल आणविक बादलों (molecular clouds) में होता है, जिन्हें तारकीय नर्सरी..

तारों का निर्माण

Amit
March 27, 2025

तारों का निर्माण कैसे होता है? (How are stars formed?) तारे के जीवन चक्र के प्रारंभिक चरणों (initial stages) का विस्तार से वर्णन करें।🔗

तारा विकास
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तारों का जन्म विशाल आणविक बादलों (molecular clouds) में होता है, जिन्हें "तारकीय नर्सरी" (stellar nurseries) भी कहा जाता है। ये बादल मुख्य रूप से हाइड्रोजन (hydrogen) और हीलियम (helium) गैस, और थोड़ी मात्रा में धूल (dust) के कणों से बने होते हैं।

तारों के निर्माण की प्रक्रिया (process) इस प्रकार है:

  1. गुरुत्वाकर्षण पतन (Gravitational Collapse - ग्रेविटेशनल कोलैप्स): आणविक बादल (molecular cloud) के भीतर घनत्व (density) में उतार-चढ़ाव (fluctuations) होता है। जब किसी क्षेत्र में घनत्व एक महत्वपूर्ण बिंदु (critical point) तक पहुँच जाता है, तो वह अपने ही गुरुत्वाकर्षण (gravity) के कारण सिकुड़ने लगता है। यह गुरुत्वाकर्षण पतन (gravitational collapse) कहलाता है।

  2. प्रोटोस्टार का गठन (Formation of Protostar - प्रोटोस्टार फॉरमेशन): जैसे-जैसे बादल सिकुड़ता है, उसका केंद्रीय भाग (central region) गर्म होने लगता है। यह गर्म, घना कोर (core) एक प्रोटोस्टार (protostar) कहलाता है। प्रोटोस्टार अभी तक एक वास्तविक तारा नहीं है क्योंकि इसके कोर में परमाणु संलयन (nuclear fusion) शुरू नहीं हुआ है।

  3. पदार्थ का संचय (Accretion of Matter - अक्रिशन ऑफ़ मैटर): प्रोटोस्टार अपने चारों ओर के बादल से गैस और धूल को अपनी ओर खींचता रहता है, जिसे अभिवृद्धि (accretion) कहते है। इससे प्रोटोस्टार का द्रव्यमान (mass) और घनत्व (density) बढ़ता रहता है।

  4. टी टौरी चरण (T Tauri Phase - टी टौरी फेज): जब प्रोटोस्टार के चारों ओर से पदार्थ का गिरना बंद हो जाता है, तो वह टी टौरी (T Tauri) तारे के चरण में प्रवेश करता है। इस चरण में, तारे से शक्तिशाली तारकीय हवाएँ (stellar winds) निकलती हैं, जो शेष सामग्री को दूर धकेल देती हैं। टी टौरी तारे अभी भी अपने कोर में परमाणु संलयन (nuclear fusion) शुरू करने के लिए पर्याप्त गर्म नहीं होते हैं।

  5. मुख्य अनुक्रम चरण (Main Sequence Stage - मेन सीक्वेंस स्टेज): लाखों वर्षों के बाद, प्रोटोस्टार का कोर (core) इतना गर्म और घना (dense) हो जाता है कि हाइड्रोजन (hydrogen) परमाणु हीलियम (helium) में संलयन (fuse) होने लगते हैं। इस प्रक्रिया को परमाणु संलयन (nuclear fusion) कहा जाता है। परमाणु संलयन से भारी मात्रा में ऊर्जा निकलती है, जिससे तारा चमकने लगता है। इस चरण में, तारा मुख्य अनुक्रम (main sequence) में प्रवेश करता है, जहाँ वह अपने जीवन का अधिकांश समय बिताता है। हमारा सूर्य (Sun) वर्तमान में एक मुख्य अनुक्रम तारा है।

फाइल 1 तारे के निर्माण के प्रारंभिक चरण
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फाइल 2 Post Main Sequence Evolution का विकास
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एक तारे का जीवनकाल (lifetime) उसके द्रव्यमान (mass) पर कैसे निर्भर करता है? विभिन्न द्रव्यमान वाले तारों के अंतिम चरण (final stages) क्या होते हैं?🔗

एक तारे का जीवनकाल (lifetime) उसके द्रव्यमान (mass) पर बहुत अधिक निर्भर करता है। तारे जितनी तेजी से अपना ईंधन (fuel) जलाते हैं, उनका जीवनकाल उतना ही कम होता है।

  • कम द्रव्यमान वाले तारे (Low-mass stars - लो-मास स्टार्स): कम द्रव्यमान वाले तारे (जैसे कि लाल बौने तारे - red dwarf stars) धीरे-धीरे अपना ईंधन जलाते हैं और अरबों वर्षों तक जीवित रह सकते हैं। उनके जीवन के अंत में, वे धीरे-धीरे ठंडे होकर सफेद बौने तारे (white dwarf stars) बन जाते हैं। अंततः, सफेद बौना तारा भी ठंडा होकर एक काला बौना तारा (black dwarf star) बन जाएगा (हालांकि, ब्रह्मांड अभी इतना पुराना नहीं है कि काले बौने तारे बन सकें)।

  • मध्यम द्रव्यमान वाले तारे (Medium-mass stars - मीडियम-मास स्टार्स): सूर्य जैसे मध्यम द्रव्यमान वाले तारे लगभग 10 अरब वर्षों तक मुख्य अनुक्रम (main sequence) में रहते हैं। जब वे अपना हाइड्रोजन ईंधन (hydrogen fuel) समाप्त कर लेते हैं, तो वे लाल दानव (red giant - रेड जायंट) बनने के लिए फैलते हैं। लाल दानव चरण में, तारे के कोर में हीलियम (helium) कार्बन (carbon) में संलयन (fuse) होता है। अंततः, तारा अपनी बाहरी परतों को खो देता है, जिससे एक ग्रहीय निहारिका (planetary nebula - प्लैनेटरी नेब्यूला) बनती है। शेष कोर (core) एक सफेद बौना तारा (white dwarf) बन जाता है।

  • अधिक द्रव्यमान वाले तारे (Massive stars - मैसिव स्टार्स): अधिक द्रव्यमान वाले तारे (सूर्य से 8 गुना या उससे अधिक द्रव्यमान वाले) बहुत तेजी से अपना ईंधन जलाते हैं और केवल कुछ मिलियन वर्षों तक जीवित रहते हैं। वे लाल महादानव (red supergiant - रेड सुपरजायंट) बन जाते हैं, जिसके कोर में भारी तत्वों (जैसे ऑक्सीजन, नियॉन, मैग्नीशियम, सिलिकॉन और अंत में लोहा) का संलयन होता है। जब कोर लोहे (iron) का बन जाता है, तो परमाणु संलयन (nuclear fusion) रुक जाता है, और तारा एक सुपरनोवा (supernova) विस्फोट में नष्ट हो जाता है। सुपरनोवा विस्फोट के बाद, तारे का अवशेष (remnant) या तो एक न्यूट्रॉन तारा (neutron star) या एक ब्लैक होल (black hole) बन जाता है।

    • न्यूट्रॉन तारा (Neutron Star - न्यूट्रॉन स्टार): यदि अवशेष का द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान के लगभग 1.4 से 3 गुना के बीच है, तो यह एक न्यूट्रॉन तारा बन जाएगा। न्यूट्रॉन तारे अविश्वसनीय रूप से घने (dense) होते हैं।

    • ब्लैक होल (Black Hole - ब्लैक होल): यदि अवशेष का द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान के 3 गुना से अधिक है, तो गुरुत्वाकर्षण इतना मजबूत होगा कि कुछ भी (प्रकाश भी नहीं) बच नहीं सकता, और यह एक ब्लैक होल बन जाएगा।

तारकीय विकास में "हर्ट्ज़स्प्रंग-रसेल आरेख" (Hertzsprung-Russell Diagram - HR Diagram) की क्या भूमिका है?🔗

हर्ट्ज़स्प्रंग-रसेल आरेख (Hertzsprung-Russell diagram), जिसे संक्षिप्त में HR आरेख कहा जाता है, तारकीय खगोल विज्ञान (stellar astronomy) में एक महत्वपूर्ण उपकरण (tool) है। यह तारों के निरपेक्ष कांतिमान (absolute magnitude - एब्सोल्यूट मैग्नीट्यूड) या चमक (luminosity - ल्यूमिनोसिटी) को उनके प्रभावी तापमान (effective temperature - इफेक्टिव टेम्परेचर) या वर्णक्रमीय प्रकार (spectral type - स्पेक्ट्रल टाइप) के विरुद्ध प्लॉट (plot) करता है।

HR आरेख की भूमिका (Role of HR Diagram):

  1. तारों का वर्गीकरण (Classification of Stars - क्लासिफिकेशन ऑफ़ स्टार्स): HR आरेख तारों को उनकी भौतिक विशेषताओं (physical characteristics - फिजिकल कैरेक्टरस्टिक्स) के आधार पर वर्गीकृत करने में मदद करता है। तारे आरेख पर विशिष्ट क्षेत्रों (specific regions) में समूहित (grouped) होते हैं, जैसे कि मुख्य अनुक्रम (main sequence), लाल दानव (red giants), महादानव (supergiants), और सफेद बौने (white dwarfs)।

  2. तारकीय विकास को समझना (Understanding Stellar Evolution - अंडरस्टैंडिंग स्टेलर एवोल्यूशन): HR आरेख तारों के विकासवादी पथ (evolutionary paths) को समझने में मदद करता है। जैसे-जैसे तारे विकसित होते हैं, वे आरेख पर एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं। उदाहरण के लिए, एक तारा मुख्य अनुक्रम (main sequence) पर अपना अधिकांश जीवन बिताता है, फिर लाल दानव (red giant) शाखा की ओर बढ़ता है, और अंततः सफेद बौने (white dwarf) क्षेत्र में समाप्त होता है।

  3. तारों के गुणों का अनुमान लगाना (Estimating Stellar Properties - एस्टिमेटिंग स्टेलर प्रॉपर्टीज): HR आरेख का उपयोग किसी तारे के द्रव्यमान (mass), त्रिज्या (radius), और आयु (age) का अनुमान लगाने के लिए किया जा सकता है, भले ही इन गुणों को सीधे मापना मुश्किल हो।

  4. तारों के समूहों का अध्ययन (Studying Star Clusters - स्टडीइंग स्टार क्लस्टर्स): HR आरेख का उपयोग तारों के समूहों (star clusters), जैसे कि गोलाकार समूह (globular clusters) और खुले समूह (open clusters) का अध्ययन करने के लिए किया जाता है। चूँकि एक समूह के सभी तारे लगभग एक ही समय में और एक ही सामग्री से बने होते हैं, इसलिए उनके HR आरेख उनकी आयु और रासायनिक संरचना (chemical composition) के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं।

संक्षेप में, हर्ट्ज़स्प्रंग-रसेल आरेख (Hertzsprung-Russell diagram) तारों के भौतिक गुणों (physical properties), उनके विकास (evolution), और उनके समूहों (clusters) के गुणों को समझने के लिए एक शक्तिशाली उपकरण (powerful tool) है।


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